Karunakara Perumal Temple, Thirukkaragam
Thiru Kaaragam
Richard Mortel from Riyadh, Saudi Arabia · CC BY 2.0 · source
उलगलन्द परिसर के मंदिरों में से एक।
Sthala Purāṇam
तिरुक्काऱगम् के अर्चामूर्ति श्री करुणाकर पेरुमाळ हैं ('करुणा के धाम'), जिनकी सहचरी पद्ममणि नाच्चियार हैं; आज वे काञ्चीपुरम् में उलगलन्द पेरुमाळ (तिरु ऊरगम्) परिसर के भीतर विराजमान चार Divya Desam में से एक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। यहाँ की स्वतंत्र स्थलगाथा क्षीण है। काऱगम् नाम का सम्बन्ध गर्ग (गार्ग्य) ऋषि से जोड़ा जाता है, जिनके विषय में कहा जाता है कि उन्होंने इसी स्थान पर तपस्या करके ज्ञान प्राप्त किया, और वह स्थान गरगाहम् कहलाया, जो आगे चलकर काऱगम् बन गया। करुणाकर नाम की व्याख्या मेघ-उपमा से की जाती है: भगवान को उन वर्षा-मेघों के समान बताया गया है जो बदले में कुछ भी आशा किए बिना संसार पर वर्षा बरसाते हैं, जो यह सूचित करता है कि वे अपनी कृपा निःस्वार्थ भाव से प्रदान करते हैं, और अपने भक्तों से केवल शुद्ध भक्ति (bhakti) की ही अपेक्षा रखते हैं। इस मंदिर का गुणगान Nālāyira Divya Prabandham में Thirumangai Āḻvār द्वारा किया गया है, जिन्होंने उलगलन्द परिसर में अब समाहित काञ्ची के मंदिरों को सम्मानित करने वाले अपने तिरुनेडुन्दाण्डगम् के अंश के रूप में इसकी स्तुति में एक pāsuram गाया। (भगवान की मुद्रा और दिशा के विषय में स्रोत भिन्न हैं — कुछ करुणाकर पेरुमाळ को दक्षिणाभिमुख खड़ी मुद्रा में बताते हैं और अन्य आदिशेष पर उत्तराभिमुख विराजमान।)
Mangalāśāsanam — the Āḻvār pāsurams
The Lord Karunakara Perumal with Padmamani Nachiyar of Thiru Kaaragam is glorified in 1 pāsurams by:
तिरुक्काऱगम् (तिरु काऱगम्), काञ्चीपुरम् स्थित श्री करुणाकर Perumāḷ का मंदिर, 108 Divya Desam में 52वाँ है और आज तिरुनीरगम् तथा तिरुक्काऱवाणम् के साथ उलगलन्द Perumāḷ (तिरु ऊरगम्) परिसर के भीतर प्रतिष्ठित चार Divya Desam में से एक है। यहाँ भगवान करुणाकर Perumāḷ हैं ('करुणा के धाम') और Thāyār पद्ममणि नाच्चियार (रामामणि) हैं। इसका Mangalāśāsanam केवल एक ही Āḻvār — Thirumangai Āḻvār — द्वारा गाया गया है, और वस्तुतः एक ही pāsuram से बना है — इस मंदिर का अपना पूरा पदिगम् (दशक) नहीं है। यह पद्य तिरुनेडुन्दाण्डगम् 8 है (Thirumangai Āḻvār की रचनाओं में, Nālāyira Divya Prabandham का इरण्डाम् आयिरम्), प्रसिद्ध 'नीरगत्ताय्' pāsuram, जिसमें एक विरहिणी नायिका के स्वर में भगवान को उनके काञ्ची के अनेक धामों के नामों को एक साथ पिरोकर पुकारा गया है: तिरुनीरगम्, तिरुवेङ्कटम् ('ऊँचे पर्वत के शिखर पर'), निलात्तिङ्गल् तुण्डम्, तिरु ऊरगम् ('काञ्ची को भरते हुए'), तिरुवेह्का, तिरुक्काऱगम्, तिरुक्काऱवाणम्, और तिरुप्पेर (कोविलडि)। तिरुक्काऱगम् इस पंक्ति में आता है 'उलगम् एत्तुम् काऱगत्ताय्' — 'हे वह, जिनकी तिरुक्काऱगम् में खड़ी उपस्थिति की समस्त जगत् स्तुति करता है' — जो यहाँ भगवान को उनके त्रिविक्रम (उलगलन्द) पराक्रम से जोड़ता है, जिसके द्वारा उन्होंने तीनों लोकों को नापा और सबके शरणागत होने के लिए स्वयं को उपलब्ध कराया। मंदिर का नाम काऱगम् गर्ग (गार्ग्य) ऋषि से व्युत्पन्न है, जिनके विषय में कहा जाता है कि उन्होंने यहाँ ज्ञान प्राप्त किया (गरगाहम् > काऱगम्)। टिप्पणी: कार्य के इस संकेत के विपरीत कि यह श्रीरङ्गम्/श्रीविल्लिपुत्तूर वर्ग का एक 'प्रमुख' मंदिर है, तिरुक्काऱगम् वस्तुतः क्षीण स्वतंत्र स्थलगाथा और केवल एक साझा pāsuram वाला एक लघु मंदिर है; यह आकलन कार्य के संकेत के बजाय प्रामाणिक स्रोतों से किया गया है।
Pāsuram references
- In this verse the heroine (the soul, in nAyikA bhAvam) calls out to the Lord by the names of His many Kanchipuram and Chola-country abodes, longing for His feet. She addresses Him: 'O Lord present in Thiruneeragam; O One atop the tall mountain (Thiruvenkatam); O One of Nilathingal Thundam (the crescent-moon shrine); O One filling Kanchi as Thiru Ooragam; O One reclining at Thiruvehka with its fine bathing ghats; O One dwelling in the hearts of those who meditate on You; O One whose standing presence at Thirukkaragam the whole world praises (ulagam Eththum kAragaththAy); O One of Thirukkarvanam; O cunning Lord (kaLvA); O One fixed at Thirupper (Koviladi) on the southern bank of the lovely Kaveri; O One who, never leaving, abides within my heart — O my Lord, it is Your sacred feet alone that I have sought and cherished.' The phrase 'ulagam Eththum kAragaththAy' is the Thirukkaragam mangalasasanam: the Lord stands at Thirukkaragam as Karunakara Perumal so that the whole world may praise and surrender to Him, recalling His Trivikrama feat of striding the three worlds. — Thirumangai Alvar, Thirunedunthandakam Pasuram 8 (Periya Thirumozhi / Irandam Ayiram; Thirunedunthandakam verse 8) · source ↗
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