Arulmaakadal Perumal Temple (Sala Sayana Perumal), Thirusirupuliyur
Thiru Sirupuliyur
பா.ஜம்புலிங்கம் · CC BY-SA 4.0 · source
व्याघ्रपाद ऋषि (बाघ के पैरों वाले ऋषि) से सम्बद्ध।
Sthala Purāṇam
तिरुसिऱुपुलियूर स्थित अरुळ्माकडल पेरुमाळ मन्दिर, जो मयिलाडुदुऱै ज़िले में है, एक दिव्य देशम है जहाँ भगवान विष्णु स्थलशयन पेरुमाळ के रूप में शयन करते हैं, जिन्हें अरुळ्माकडल पेरुमाळ कहा जाता है, संस्कृत में कृपासमुद्र अर्थात् करुणा का सागर, और जिनकी संगिनी थायार के रूप में तिरुमामगळ नाच्चियार विराजती हैं। यहाँ का प्रमुख स्थल पुराणम महान सिद्धों में गिने जाने वाले व्याघ्रपाद ऋषि से सम्बन्धित है, जो बाघ के समान चरणों वाले भक्त थे। शिव ने अपने इस भक्त को वैकुण्ठ की प्राप्ति कराने की इच्छा से व्याघ्रपाद को विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या करने का परामर्श दिया; अतः वे पतञ्जलि ऋषि के साथ श्रीरंगम की ओर निकल पड़े। पतञ्जलि की क्षीण होती दृष्टि और दोनों ऋषियों की अत्यधिक वृद्धावस्था के कारण वे दक्षिण की ओर मार्ग भटक गए और इस स्थान पर पहुँच गए, जो कृपा समुद्रम कहलाता है। वृद्ध ऋषि विष्णु के विराट स्वरूप को स्पष्ट रूप से देखने में असमर्थ थे, इसलिए भगवान ने एक छोटे से शयन-रूप में दर्शन दिए, जिसे बाल शयनम कहा जाता है; इसी लघुता के साथ व्याघ्रपाद के बाघ-स्वभाव के मेल से इस स्थान को सिऱुपुलियूर अर्थात् छोटे बाघ की नगरी का नाम मिला। यहाँ की यह शयन-मुद्रा, जो आदिशेष नाग पर नहीं है, एक दुर्लभ विशेषता मानी जाती है, जिसमें भगवान दक्षिण की ओर मुख किए हुए हैं। व्याघ्रपाद तथा कण्व ऋषि की मूर्तियाँ गर्भगृह के भीतर विराजमान हैं। ये प्रसंग ब्रह्माण्ड पुराण में अंकित बताए जाते हैं। इस पावन धाम का मंगलाशासनम तिरुमंगै आळ्वार ने नालायिर दिव्य प्रबंधम के अंतर्गत अपने पेरिय तिरुमोऴि में किया, जिन्होंने भगवान को असीम करुणा के साकार स्वरूप के रूप में प्रशंसित किया।
Mangalāśāsanam — the Āḻvār pāsurams
The Lord Arulmaakadal Perumal (Krupaa Samudra Perumal) with Thirumaamagal Nachiyar (Dayanayaki) of Thiru Sirupuliyur is glorified by:
थिरुसिरुपुलियूर के अरुळ्माकडल पेरुमाळ (कृपा समुद्र / 'करुणा का सागर') को केवल थिरुमंगै आऴ्वार से ही मंगलाशासनम् प्राप्त हुआ - उनकी पेरिय थिरुमोऴि में 10 पासुरम् का एक दशक। भजन-परम्परा बताती है कि आऴ्वार को पहले छोटी शयन मूर्ति देखकर निराशा हुई और बाद में अदिशेष पर शयन करने वाले साल सायन पेरुमाळ के रूप में भगवान की सच्ची महिमा को समझकर वे आनन्दविभोर हो उठे। यहाँ किसी ठीक-ठीक तमिऴ पाठ का दावा नहीं किया गया है, क्योंकि इस दशक के लिए कोई प्रामाणिक मूल-स्रोत पद विश्वासपूर्वक प्राप्त नहीं हुआ।
Pāsuram references
- Thirumangai Alvar sings a decade of 10 pasurams on Arulmaakadal Perumal (Krupaa Samudra - 'ocean of compassion') of Thiru Sirupuliyur. By tradition the Alvar was at first disappointed by the small size of the reclining icon, but the Lord revealed His greatness; the Alvar then praises Him as Sala Sayana Perumal reclining on Adisesha and as an ocean of grace - one of only two Divya Desams (with Srirangam) where Vishnu reclines facing south. — Thirumangai Alvar, Periya Thirumozhi (Thirumangai Alvar) · source ↗
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📍 10.99056, 79.66972
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