Aadhi Varaha Perumal Temple, Thirukkalvanur
Thirukkalvanur
Chronikhiles · CC0 · source
शक्ति मन्दिर (कामाक्षी अम्मन) के भीतर स्थित एक दुर्लभ विष्णु Divya Desam।
Sthala Purāṇam
थिरुक्कलवनूर के मूलवर अधिमूर्ति आदि वराह पेरुमाळ हैं — विष्णु का आदि वराह (सूकर) अवतार, जिनके साथ थायार अंजिलै वल्लि नाच्चियार (भूदेवी / नीलमंगै) विराजमान हैं; वे पश्चिमाभिमुख खड़ी मुद्रा में पूजे जाते हैं। यह सन्निधि अत्यन्त अनोखे रूप से बड़े कांचीपुरम में स्थित कामाक्षी अम्मन मन्दिर परिसर के भीतर, देवी के गर्भगृह के एक ओर स्थित है। यह स्वरूप उस प्रसिद्ध वराह कथा का स्मरण कराता है, जिसमें विष्णु ने सूकर रूप धारण कर भूदेवी (पृथ्वी देवी) को अपनी दाढ़ों पर उठाया और हिरण्याक्ष नामक असुर द्वारा उन्हें ब्रह्माण्डीय सागर में खींच ले जाने के पश्चात उनका उद्धार किया — इस प्रकार यहाँ भगवान् उद्धृत पृथ्वी रूपी अपनी देवी भूदेवी से जुड़े हैं। स्थानीय Sthala Purāṇam 'कल्वन' (चोर) नाम की और इसी कारण थिरुक्कलवनूर नाम की व्याख्या इस प्रकार करता है: जब पार्वती (कामाक्षी रूप में) और श्री लक्ष्मी काम कोष्ठम् में स्नान कर रही थीं, तब Emperumān एक स्तम्भ के पीछे छिपकर उन्हें देख रहे थे; पकड़े जाने पर देवी ने विनोदपूर्वक उन्हें 'दण्ड' देते हुए उन्हें खड़ा कराया, बैठाया तथा शयन कराया, और उनका नाम 'कल्वन' रखा — वह जिसने चोरी से दर्शन किया। क्योंकि भगवान् ने वह छिपी झलक 'चुरा' ली थी, इसलिए वे देवी की सन्निधि के भीतर केवल सीमित एवं प्रतिबन्धित दर्शन प्रदान करते हैं। यह Divya Desam Nālāyira Divya Prabandham में महिमामण्डित है; थिरुमंगै Āḻvār ने इसका Mangalāśāsanam किया है (पेरिय थिरुमोऴि में एक pāsuram), जिससे यह 108 Divya Desams में प्रतिष्ठित होता है।
Mangalāśāsanam — the Āḻvār pāsurams
The Lord Aadhi Varaha Perumal with Anjilaivalli Nachiyar of Thirukkalvanur is glorified in 1 pāsurams by:
थिरुक्कलवनूर (श्री आदि वराह पेरुमाळ मन्दिर, जो कांचीपुरम के कामाक्षी अम्मन मन्दिर परिसर के भीतर स्थित है) को केवल एक ही Āḻvār — थिरुमंगै Āḻvār — का Mangalāśāsanam प्राप्त है, जिन्होंने इसे एक pāsuram प्रदान किया है। यह उन छोटे कांची Divya Desams में से एक है जिनका आह्वान थिरुमंगै अपने थिरुनेडुन्तण्डकम् में करते हैं, जहाँ विरहिणी नायिका अनेक कांची सन्निधियों में भगवान् की उपस्थिति के माध्यम से उन्हें पुकारती है और 'कळ्वनूर्' नाम लेती है — वह विनोदी 'चोर' (कल्वन) जो भक्त के हृदय को चुरा लेता है — नीरगम्, ऊरगम्, कारगम्, कार्वणम् और नीलत्तिङ्गळ् तुण्डम् के साथ। प्रामाणिक स्रोत (divyadesam.com, Wikipedia) सतत रूप से 'थिरुमंगै Āḻvār – 1 pāsuram' का उल्लेख करते हैं।
Pāsuram references
- In this verse the Alvar (in the heroine's voice) cries out to the one Lord who simultaneously stands at Thiruneeragam, atop the great hill (Thirumalai/Tirupati), at Thiru Nilathingal Thundam, who pervades all of Kanchi at Thiru Ooragam, reclines at Thiruvekka, stands at Thirukkaaragam and Thirukkaarvanam, and hides his beauty as the 'thief' at Kalvanur — lamenting that her weakened senses cannot reach his feet. Kalvanur is thereby honored in this single shared Mangalasasanam pasuram. — Thirumangai Alvar, Thirunedunthandakam 8 · source ↗
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